रणवीर सिंह की फिल्म 'धुरंधर' और इसके सीक्वल 'धुरंधर: द रिवेंज' ने बॉक्स ऑफिस पर शानदार प्रदर्शन करने के साथ-साथ राजनीतिक बहस भी छेड़ रखी है। अब कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने दोनों फिल्मों को देखने के बाद अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने निर्देशक आदित्य धर की फिल्ममेकिंग और कलाकारों के अभिनय की तारीफ की, लेकिन फिल्म में दिखाई गई हिंसा और राजनीतिक संदेशों पर गंभीर सवाल उठाए। थरूर को पहला भाग पसंद आया, लेकिन उन्होंने दूसरे भाग को मनोरंजन के लिहाज से ज्यादा प्रभावशाली बताया। हालांकि उनका मानना है कि कहानी को इतने हिंसक सीन के बिना भी पेश किया जा सकता था। अपने आधिकारिक यूट्यूब चैनल पर साझा किए गए करीब सात मिनट के वीडियो में उन्होंने फिल्मों के अलग-अलग पहलुओं पर खुलकर अपनी राय रखी।
'धुरंधर 2' को बताया शानदार मनोरंजक फिल्म
शशि थरूर ने फिल्म की तारीफ करते हुए कहा कि मनोरंजन और काल्पनिक कहानी के तौर पर 'धुरंधर: द रिवेंज' शानदार है। उनके मुताबिक दूसरा भाग पहले की तुलना में ज्यादा प्रभावशाली लगा। उन्होंने फिल्म के सिनेमाई प्रस्तुतिकरण और मनोरंजन के पहलू को सराहा, लेकिन साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि किसी फिल्म की तारीफ करने का मतलब उसके हर हिस्से से सहमत होना नहीं है। थरूर ने फिल्म में दिखाई गई हिंसा पर अपनी नाराजगी जाहिर की। उन्होंने कहा कि इसमें खून-खराबे, क्रूरता और परेशान करने वाले दृश्यों को जरूरत से ज्यादा विस्तार दिया गया है। उनके अनुसार कहानी को प्रभावी बनाने के लिए इतने ग्राफिक दृश्य दिखाना जरूरी नहीं था। उन्होंने इसे जरूरत से ज्यादा और हद से आगे बढ़ा हुआ बताया। थरूर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब फिल्म के एक्शन और हिंसक दृश्यों को लेकर दर्शकों के बीच भी अलग-अलग राय देखने को मिल रही है।
फिल्म में प्रोपेगेंडा और भारत-पाकिस्तान संबंधों पर सवाल
कांग्रेस सांसद ने 'धुरंधर' फ्रेंचाइजी में मौजूद राजनीतिक संदेशों पर भी चर्चा की। उन्होंने माना कि फिल्म में पाकिस्तान के चित्रण और दोनों देशों के संबंधों से जुड़े विषयों का दर्शकों की सोच पर असर पड़ सकता है। थरूर ने कहा कि फिल्म में प्रोपेगेंडा जैसा नजर आने वाला कंटेंट भी शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें मिली जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान और खाड़ी क्षेत्र के कुछ देशों में फिल्मों को लेकर प्रतिबंध या आपत्तियां सामने आई हैं। इन देशों में कथित तौर पर यह आशंका जताई गई कि फिल्म भारत और पाकिस्तान के लोगों के बीच तनाव बढ़ा सकती है। हालांकि थरूर ने इस संदर्भ में अपने विचार रखते हुए कहा कि वह ऐसी चिंताओं को समझ सकते हैं। उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि अगर पाकिस्तानी दर्शक इन फिल्मों को देखते हैं तो उनकी प्रतिक्रिया कैसी होगी। थरूर के मुताबिक फिल्म के कुछ संवादों पर दर्शक हंस सकते हैं, जबकि कुछ प्रसंग उन्हें यह सोचने पर मजबूर कर सकते हैं कि उनके देश के नाम पर क्या-क्या किया गया है।
खुफिया एजेंसियों के कामकाज से अपने अनुभव का किया जिक्र
फिल्म की कहानी एक भारतीय खुफिया एजेंट जसकीरत सिंह रंगी उर्फ हमजा अली मजारी के इर्द-गिर्द घूमती है, जो पाकिस्तान में गुप्त मिशन पर जाता है। इसमें खुफिया अभियानों, जोखिम भरे ऑपरेशनों और पर्दे के पीछे होने वाली गतिविधियों को नाटकीय अंदाज में दिखाया गया है। थरूर ने अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उन्होंने भारतीय खुफिया अधिकारियों के साथ बातचीत और सूचनाओं के आदान-प्रदान के जरिए काम किया है। उनका अनुभव विश्लेषण, चर्चा और जानकारी साझा करने तक सीमित रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी उस तरह की गुप्त गतिविधियों या दूर-दराज की राजधानियों में विस्फोट कराने जैसे आदेशों वाली दुनिया को करीब से नहीं देखा, जैसा फिल्मों में दिखाया जाता है। उनके मुताबिक पर्दे पर दिखाई जाने वाली जासूसी की दुनिया और वास्तविक अनुभवों के बीच अंतर हो सकता है। इसलिए दर्शकों को फिल्म के घटनाक्रम को वास्तविकता मानने के बजाय मनोरंजन और कल्पना के नजरिए से भी देखना चाहिए।
आर माधवन के किरदार की समयसीमा पर भी जताई असहमति
शशि थरूर ने फिल्म में आर माधवन के किरदार अजय सान्याल को लेकर भी सवाल उठाए। इस किरदार को राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल से प्रेरित माना जाता है। थरूर को यह बात अविश्वसनीय लगी कि कोई एक अधिकारी 1990 के दशक के आखिरी वर्षों से लेकर मौजूदा समय तक उसी पद पर बना रह सकता है। उन्होंने कहा कि इस तरह की कहानी को पूरी तरह वास्तविक घटनाओं का चित्रण मानना सही नहीं होगा। उनके मुताबिक फिल्म को एक काल्पनिक कहानी के रूप में देखना बेहतर है, जिसमें कुछ खास विचार और संदेश देने की कोशिश की गई है। गौरतलब है कि 'धुरंधर' दिसंबर 2025 में और 'धुरंधर: द रिवेंज' मार्च 2026 में रिलीज हुई थी। दोनों फिल्मों ने दुनियाभर में कथित तौर पर 3100 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया है।
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